Drain cleaning turns into a nuisance instead of a relief; sludge scattered on the roads is adding to the woes of commuters.

राहत की जगह आफत बनी नाला सफाई; सड़कों पर बिखरा कीचड़ बढ़ा रहा राहगीरों की मुसीबत

उत्तर प्रदेश

| The News Times | चन्दौली : मानसून के आगमन से पहले नगर पालिका द्वारा नगर के मुख्य नालों की सफाई का कार्य कराया जा रहा है, ताकि आगामी बारिश में जलजमाव की स्थिति से निपटा जा सके। कागजों और दावों में तो यह जनता को राहत देने वाली मुहिम है, लेकिन धरातल पर नगर पालिका की लापरवाही के कारण यह सफाई ही अब आम जनता के लिए सबसे बड़ी आफत बन चुकी है।

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सफाई के नाम पर खानापूर्ति, सड़कों पर बिखरा दुर्घटना को न्योता देता मलबा :
नगर पालिका द्वारा नालों से निकाला गया गंदा मलबा और सिल्ट (कीचड़) को तुरंत हटाने के बजाय सड़कों के किनारे ही बिखेर कर छोड़ दिया जा रहा है। मुख्य मार्गों पर फैले इस मलबे के कारण राहगीरों और वाहन चालकों को निकलने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी दोपहिया और साइकिल सवारों को हो रही है, जो इस चिकने कीचड़ पर अनियंत्रित होकर आए दिन चोटिल हो रहे हैं।

संक्रमण का बढ़ा खतरा, बदबू से स्थानीय लोग और दुकानदार बेहाल :
नाले के इस सड़े हुए मलबे से उठने वाली दुर्गंध ने स्थानीय दुकानदारों और राहगीरों का जीना मुहाल कर दिया है। भीषण गर्मी और उमस के बीच सड़क पर सड़ रहे इस कीचड़ से इलाके में संक्रामक बीमारियों और महामारी फैलने का खतरा लगातार मंडरा रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सफाई के नाम पर टैक्स वसूलने वाला प्रशासन जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है।

पहली ही बारिश में खुली दावों की पोल: बहकर पुनः नाले में समा रहा कीचड़
नगर पालिका की कार्यशैली का सबसे गैर-जिम्मेदाराना पहलू यह है कि यह मलबा एक-दो दिन नहीं, बल्कि हफ़्तों तक सड़कों पर ज्यों का त्यों पड़ा रहता है। इसी बीच जब भी हल्की बारिश होती है, तो यह सारा मलबा बहकर दोबारा उसी नाले में चला जाता है जहाँ से इसे निकाला गया था। ऐसे में पालिका की इस आधी-अधूरी सफाई व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर इस तरह की बेपटरी सफाई से जनता को क्या फायदा मिल रहा है? यह सिर्फ सरकारी बजट को ठिकाने लगाने की कवायद बनकर रह गई है।

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