| The News Times | चन्दौली : उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में इन दिनों सोशल मीडिया पर एक गाना खूब सुर्खियां बटोर रहा है— “दबदबा था, दबदबा है, दबदबा बना रहेगा”।। लेकिन यह सिर्फ एक गीत नहीं रह गया है, बल्कि जिले की सड़कों पर दौड़ रही लग्जरी गाड़ियों के लिए एक अघोषित ‘स्टेटस सिंबल’ बन चुका है। आलम यह है कि केंद्र सरकार की सख्त पाबंदियों के बावजूद चंदौली की सड़कों पर वीआईपी कल्चर का नंगा नाच देखने को मिल रहा है।
प्रतिबंध के बाद भी हूटरों की गूंज :
केंद्र सरकार ने वीआईपी कल्चर को खत्म करने के लिए मंत्री, अफसर और जन प्रतिनिधियों की गाड़ियों पर हूटर और नीली/लाल बत्ती लगाने के नियम को प्रतिबंधित कर दिया था। नियम के मुताबिक, हूटर का इस्तेमाल केवल आपातकालीन सेवाओं (एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड और पुलिस) के लिए ही किया जा सकता है। लेकिन चंदौली में हकीकत इससे कोसों दूर है।
जिले के मुख्यालय से लेकर सुदूर इलाकों तक ऐसी दर्जनों लग्जरी गाड़ियां देखी जा सकती हैं, जिनमें न केवल अवैध हूटर लगे हैं, बल्कि काली फिल्म (Black Film) और कान फोड़ू प्रेशर हॉर्न का भी धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा है।
विधानसभा पास का दुरुपयोग :
हैरानी की बात यह है कि कई ऐसी निजी गाड़ियों पर ‘विधानसभा’ के पास और सचिवालय के स्टिकर लगे देखे जा सकते हैं, जिनमें न तो कोई जनप्रतिनिधि सवार होता है और न ही वह गाड़ी किसी अधिकृत पद पर तैनात व्यक्ति की होती है। ये गाड़ियां महज़ ‘रसूख’ दिखाने के लिए नियमों की धज्जियां उड़ा रही हैं।
पुलिस की चुप्पी पर सवाल :
स्थानीय नागरिकों का मानना है कि इन रसूखदार गाड़ी मालिकों के सामने यातायात विभाग और स्थानीय पुलिस पूरी तरह ‘बौनी’ नजर आती है। जब ये लग्जरी गाड़ियां हूटर बजाते हुए और यातायात नियमों को ठेंगा दिखाते हुए पुलिस के सामने से गुजरती हैं, तो कोई भी उन पर हाथ डालने की हिम्मत नहीं जुटा पाता। ऐसा प्रतीत होता है कि कानून का नहीं, बल्कि इन रसूखदारों का यातायात विभाग पर ‘दबदबा’ बना हुआ है।
क्या कहता है कानून?
- केंद्रीय मोटर यान नियम 1989: इस कानून के तहत किसी भी निजी या गैर-आपातकालीन वाहन में मल्टी-टोन हॉर्न या हूटर लगाना पूरी तरह प्रतिबंधित है।
- नियमों का उल्लंघन: हूटर की तेज आवाज न केवल ध्वनि प्रदूषण फैलाती है, बल्कि सड़क पर चल रहे अन्य चालकों का ध्यान भटकाती है, जिससे बड़ी दुर्घटनाएं होने की आशंका बनी रहती है।
चंदौली में पुलिस का ‘चेकिंग अभियान’ केवल आम जनता और बाइक सवारों के हेलमेट तक ही सीमित नजर आता है। अब देखना यह है कि क्या प्रशासन इन रसूखदारों के ‘दबदबे’ को कम कर कानून का राज स्थापित कर पाता है या नहीं।
इस पूरे मामले में सीओ यातायात कृष्ण मुरारी शर्मा ने बताया कि… इस तरह के मामलों पर लगाम लगने के लिए नियमित चेकिंग होती है। इन्फोर्समेंट की कार्यवाई लगातार की जा रही है। ऐसी गाड़ियों पर लगातार चालान और एमवी एक्ट के तहत सुसंगत धाराओं में कार्यवाई की जा रही है। इसके बावजूद हम ऐसी गाड़ियों पर सतर्क नजर रखे हुए हैं। साथ ही इनकी सीजर की कार्यवाई के लिए भी टीआई को निर्देशित किया गया है।

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