Chandauli: Major Racket Exposed in Gun Licensing! FIR Filed Against Two Gun House Operators; Names and Addresses Found to be Bogus During Investigation.

Chandauli : शस्त्र लाइसेंस के नाम पर बड़ा खेल! दो गन हाउस संचालकों पर FIR, जांच में नाम-पते निकले फर्जी

उत्तर प्रदेश

| The News Times | चंदौली : जनपद के दो गन हाउस संचालकों द्वारा किए गए एक बड़े फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ हुआ है। प्रशासन की ओर से की गई गहन जांच के बाद अलीनगर थाने में दो गन हाउस अनुज्ञापियों (Licensees) के खिलाफ गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है। आरोप है कि इन्होंने शस्त्र लाइसेंस के रिकॉर्ड में फर्जी नाम और पतों का इस्तेमाल कर नियमों की धज्जियां उड़ाई हैं।

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जांच में खुली धांधली की पोल :
मिली जानकारी के अनुसार, पुलिस और प्रशासन की टीम द्वारा गन हाउसों के रिकॉर्ड और शस्त्र लाइसेंस धारकों के सत्यापन (Verification) का कार्य किया जा रहा था। इस दौरान दो प्रमुख गन हाउसों के अभिलेखों में दर्ज कई लाइसेंस धारकों के नाम और उनके द्वारा दिए गए पते पूरी तरह फर्जी पाए गए। जब इन पतों पर भौतिक सत्यापन किया गया, तो वहां संबंधित व्यक्ति का कोई नामोनिशान नहीं मिला।

इनके खिलाफ दर्ज हुआ मुकदमा :
प्रशासनिक तहरीर के आधार पर अलीनगर थाने में दो गन हाउस संचालकों के खिलाफ सरकारी दस्तावेजों में हेरफेर करने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया है। वर्तमान में पुलिस इस बात की गहराई से पड़ताल कर रही है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जो कारतूस और असलहे जारी किए गए, वे किन हाथों में पहुंचे हैं। पुलिस की ओर से दोनों प्रतिष्ठानों के अनुज्ञापियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई है। वहीं दोनों प्रतिष्ठानों का नवीनीकरण भी वर्ष 2021 के बाद नहीं हुआ था। जांच में सामने आया कि शस्त्र लाइसेंस धारक मोहम्मद कल्लू निवासी ग्राम बड़गांवा, थाना शहाबगंज ने 160 कारतूस, जितेन्द्र सिंह निवासी ग्राम चौथी, थाना भभुआ, जनपद कैमूर बिहार ने 125 कारतूस और लाइसेंस शस्त्र धारक मुकुन्द रावत निवासी चैनपुर जनपद भभुआ बिहार ने एक वर्ष में 399 कारतूस खरीदे गये लेकिन सभी ने इनका उपयोग नियम विरुद्ध तरीके से किया। जांच दौरान सामने आया कि जीएस गन हाउस पड़ाव पीडीडीयू नगर व वीर गन हाउस चन्दौली का भी नवीनीकरण वर्ष 2021 के बाद नहीं हुआ है। इस पर विभाग की ओर से आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।

सुरक्षा के लिहाज से बड़ी लापरवाही :
फर्जी पतों पर शस्त्र लाइसेंस का रिकॉर्ड दर्ज होना सुरक्षा के नजरिए से एक बड़ा खतरा माना जा रहा है। पुलिस यह भी जांच रही है कि इस खेल में क्या कुछ विभागीय कर्मियों की भी मिलीभगत थी? जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक के कड़े निर्देश के बाद अब जिले के अन्य गन हाउसों के रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं।

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